बिहार: ‘केवल तीन लोग चला रहे सरकार’, तेजस्वी यादव का नीतीश और NDA पर करारा हमला; बताया ‘निरर्थक’ शासन
बिहार की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के नेतृत्व वाली सम्राट चौधरी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने राज्य की मौजूदा प्रशासनिक स्थिति को ‘अराजक’ बताते हुए कहा कि बिहार के लोगों को अब इस सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है।
1. ‘तीन लोगों की मनमानी’ का आरोप
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में सरकार के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछले 15 दिनों से बिहार की सत्ता केवल तीन लोगों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।
- अधूरा मंत्रिमंडल: तेजस्वी के अनुसार, बिना पूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार के महत्वपूर्ण और अलोकतांत्रिक निर्णय लिए जा रहे हैं।
- चिंतन का अभाव: उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी विमर्श या नीतिगत स्पष्टता के राज्य को चलाया जा रहा है, जिससे जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।
2. नीतीश कुमार की ‘पलटी मार’ राजनीति पर तंज
नीतीश कुमार के बार-बार पाला बदलने को लेकर तेजस्वी ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सत्ता की भूख में नैतिकता और लोकलाज को ताक पर रख दिया गया है।
- शपथ का रिकॉर्ड: तेजस्वी ने याद दिलाया कि पिछले 12 वर्षों में 10 बार सरकार का गठन-पुनर्गठन हुआ है, जिसमें नीतीश कुमार ने आठ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
- दिशाहीन बिहार: उन्होंने सीएम की विचारधारा को ‘क्षणभंगुर’ बताते हुए कहा कि उनकी इस चंचलता ने बिहार को पूरे देश में उपहास का पात्र बना दिया है।
3. 46% समय व्यर्थ होने का दावा
तेजस्वी ने एक दिलचस्प आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि षड्यंत्र से बनी इस सरकार के कार्यकाल का करीब 46.03 फीसदी समय व्यर्थ जा चुका है। आधे समय के बाद भी सरकार के पास विकास का कोई स्पष्ट रोडमैप या लक्ष्य नहीं है। उनके मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद केवल छह महीने में राज्य ने दो मुख्यमंत्री देख लिए हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
4. ‘निरर्थक सरकार’ से कोई उम्मीद नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की वर्तमान समस्याओं की एक लंबी सूची गिनाई और कहा कि एनडीए सरकार अब अप्रासंगिक हो चुकी है। उनके प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- बेलगाम नौकरशाही और भ्रष्टाचार: प्रशासन पूरी तरह से अधिकारियों के हाथ में है और भ्रष्टाचार अनियंत्रित हो गया है।
- ध्वस्त कानून व्यवस्था: तेजस्वी ने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए विधि व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- बेरोजगारी और पलायन: उन्होंने कहा कि बिहार के युवा, किसान और व्यापारी अब सरकार से नाउम्मीद हो चुके हैं।
5. ‘स्वयं की समस्या बनी सरकार’
तेजस्वी यादव ने अंत में कहा कि जो सरकार खुद अपने आंतरिक अंतर्विरोधों और अस्थिरता से जूझ रही है, वह जनता की समस्याओं का समाधान कैसे करेगी? उन्होंने एनडीए सरकार को ‘असंवेदनशील’ करार देते हुए कहा कि यह शासन केवल तंत्र में बैठे लोगों का पोषण कर रहा है, आम जनता का नहीं।
निष्कर्ष
तेजस्वी यादव का यह हमला बिहार में आने वाले सियासी तूफान का संकेत है। जहां एक ओर सम्राट चौधरी सरकार अपनी प्राथमिकताओं को सेट करने में जुटी है, वहीं विपक्ष ने ‘अराजकता’ और ‘अस्थिरता’ के मुद्दे पर घेराबंदी शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देता है।
Post Comment