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बिहार: पॉलीटेक्निक कॉलेज में ‘ड्रेस कोड’ को लेकर भारी हंगामा, बिना यूनिफॉर्म आए 50 छात्रों को गेट पर रोका

मुख्य बातें:

  • स्थान: राणाबीघा, बाढ़ अनुमंडल (पटना)।
  • मामला: बिना यूनिफॉर्म के छात्रों का प्रवेश वर्जित।
  • छात्रों का आरोप: बिना पूर्व सूचना के अचानक लिया गया फैसला।
  • विवाद: हॉस्टल और बाहरी छात्रों के बीच भेदभाव का आरोप।

पटना (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ राणाबीघा स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के गेट पर सोमवार सुबह जबरदस्त हंगामा हुआ। कॉलेज प्रशासन द्वारा अचानक ‘ड्रेस कोड’ को सख्ती से लागू करने के कारण 50 से अधिक छात्र-छात्राओं को परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। गार्ड द्वारा रोके जाने के बाद नाराज छात्रों ने कॉलेज गेट पर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह जब छात्र हमेशा की तरह कॉलेज पहुंचे, तो मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया। इसका कारण छात्रों का निर्धारित यूनिफॉर्म में न होना बताया गया। छात्रों का दावा है कि करीब 50 से अधिक छात्र-छात्राएं बिना ड्रेस के थे, जिन्हें गेट के बाहर ही खड़ा रखा गया।

​छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन ने इस संबंध में पहले से कोई आधिकारिक नोटिस या लिखित जानकारी साझा नहीं की थी। अचानक लिए गए इस फैसले के कारण कई छात्र, जो दूर-दराज के इलाकों से आए थे, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

छात्रों के गंभीर आरोप: “नियमों में भेदभाव क्यों?”

​कॉलेज के छात्रों ने प्रबंधन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाले कई छात्र बिना यूनिफॉर्म के ही क्लास में जाते हैं, लेकिन उन पर कोई पाबंदी नहीं लगाई जाती। वहीं, जो छात्र घर से या बाहर रहकर पढ़ाई करते हैं, उनके लिए अचानक कड़े नियम लागू कर दिए गए।

खुशी (छात्रा, पटना): “मैं रोजाना करीब 60 किलोमीटर का सफर तय कर कॉलेज आती हूँ। हमें पहले कभी नहीं बताया गया कि बिना यूनिफॉर्म के प्रवेश वर्जित है। आज अचानक गेट पर रोक दिया गया। यह पूरी तरह से अनुचित है।”

अमरजीत कुमार (छात्र, खुसरूपुर): “बिना किसी सूचना के गेट बंद कर देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। 50 से ज्यादा छात्र बाहर खड़े रहे और कई को मजबूरन वापस घर लौटना पड़ा।”

अमन कुमार (फाइनल ईयर छात्र, बख्तियारपुर): “सुबह 9 बजे तक जो छात्र बिना ड्रेस के आए, उन्हें अंदर जाने दिया गया। लेकिन 9:20 के बाद आने वालों को रोक दिया गया। अगर नियम था, तो सबके लिए एक समान होना चाहिए था।”

कॉलेज प्रशासन की चुप्पी

​इस पूरे घटनाक्रम और छात्रों के हंगामे के बावजूद कॉलेज प्रशासन का रवैया उदासीन नजर आया। जब इस मामले पर कॉलेज के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया। प्रबंधन ने मीडिया से मिलने और अपनी बात रखने से भी मना कर दिया, जिससे छात्रों में आक्रोश और बढ़ गया है।

आगे की मांग

​छात्रों की मांग है कि उन्हें आज की क्लास अटेंड करने दी जाए और भविष्य के लिए एक स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए। छात्रों ने आश्वासन दिया है कि यदि उन्हें पहले से सूचित किया जाता है, तो वे निश्चित रूप से यूनिफॉर्म पहनकर आएंगे। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और कई छात्र बिना क्लास लिए वापस लौट गए हैं।

निष्कर्ष

​शिक्षण संस्थानों में अनुशासन के लिए ‘यूनिफॉर्म’ आवश्यक है, लेकिन बिना पूर्व सूचना के छात्रों को प्रवेश से रोकना उनके शैक्षणिक समय की बर्बादी है। कॉलेज प्रशासन को चाहिए कि वे छात्रों के साथ संवाद स्थापित करें ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

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