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​मानेसर: औद्योगिक कचरे में लगी आग से दमघोंटू हुआ वातावरण, जहरीले धुएं से निवासियों का हाल बेहाल

मानेसर। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या पहले से ही गंभीर है, और अब मानेसर के सेक्टर 87 से आई एक घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। सोमवार सुबह क्षेत्र के एक खाली प्लॉट में जमा औद्योगिक कचरे में भीषण आग लग गई। इस आग के कारण पूरे इलाके में काले और जहरीले धुएं की परत छा गई, जिससे न केवल दृश्यता (visibility) कम हुई, बल्कि मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों को सांस लेने में भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

सुबह-सुबह फैला जहरीला धुआं

​मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे सेक्टर 87 स्थित एक खाली प्लॉट में जमा कचरे के ढेर से आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते धुएं का गुबार आसमान में फैल गया। विपुल लावण्या सोसाइटी के निवासी अमित शेखर ने बताया कि जब वे सुबह टहलने निकले, तो वातावरण में गंध और काला धुआं महसूस किया। लोगों की सूचना के काफी देर बाद, लगभग सुबह 9 बजे अग्निशमन विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंची। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर 12 बजे तक आग पर काबू पाया जा सका।

कबाड़ माफियाओं की करतूत?

​स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस प्लॉट का उपयोग औद्योगिक कचरा डंप करने के लिए किया जा रहा है। नवादा गांव के विकास यादव के अनुसार, सेक्टर 81 से 86 के बीच का यह 25 एकड़ का इलाका डंपिंग ग्राउंड बन गया है। कबाड़ बीनने वाले लोग इस कचरे से प्लास्टिक और तांबे जैसी जरूरी चीजें निकालने के बाद अवशेषों में आग लगा देते हैं।

​निवासियों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि यदि कोई व्यक्ति इस अवैध गतिविधियों का विरोध करने जाता है, तो वहां मौजूद कबाड़ माफिया मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। यह पहली बार नहीं है जब यहाँ आग लगी है; पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है।

इन सोसायटियों और गांवों पर पड़ रहा असर

​कचरा जलने से निकलने वाले हानिकारक रसायन और धुआं सीधे तौर पर आस-पास की बड़ी आवासीय सोसायटियों और गांवों को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • ​विपुल लावण्या
  • ​माइक्रोटेक
  • ​डीएलएफ 86
  • ​अंसल हाइट्स
  • ​नवादा फतेहपुर और नाहरपुर गांव

​लोगों का कहना है कि इस जहरीले धुएं के कारण बच्चे और बुजुर्ग गंभीर बीमारियों, विशेषकर श्वसन रोगों (Respiratory diseases) के शिकार हो रहे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और आश्वासन

​मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सिद्धार्थ भार्गव ने कहा है कि कचरा जलाने की घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।

निष्कर्ष:

मानेसर की यह घटना औद्योगिक कचरे के प्रबंधन में भारी चूक को दर्शाती है। रिहायशी इलाकों के इतने करीब कचरा जलाना लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। अब देखना यह है कि प्रदूषण विभाग और स्थानीय प्रशासन इन ‘कूड़ा माफियाओं’ पर क्या लगाम लगाता है।

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