Bihar News: बेगूसराय में आधी रात को पुलिस का एक्शन; 400 से अधिक होमगार्ड अभ्यर्थी हिरासत में, अनशन खत्म
बेगूसराय, बिहार: बिहार के बेगूसराय जिले में पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर अड़े होमगार्ड अभ्यर्थियों पर प्रशासन ने देर रात बड़ी कार्रवाई की है। समाहरणालय परिसर में आमरण अनशन पर बैठे 400 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
आधी रात को हुआ प्रशासनिक एक्शन
मंगलवार की देर रात जब पूरा शहर सो रहा था, तब बेगूसराय प्रशासन और पुलिस की टीम भारी दलबल के साथ समाहरणालय पहुंची। पिछले तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों को जबरन बसों में भरकर वहां से हटाया गया। बताया जा रहा है कि इन अभ्यर्थियों को एनएच-31 के रास्ते हर्ल ग्राउंड ले जाया गया। इस दौरान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अंकित कुमार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है।
क्यों आंदोलन कर रहे हैं अभ्यर्थी?
यह पूरा विवाद होमगार्ड बहाली में ज्वाइनिंग को लेकर है। मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- चयन के बाद भी इंतजार: कुल 419 युवक-युवतियां शारीरिक और चिकित्सीय परीक्षा (Physical and Medical Test) पास कर चुके हैं।
- 2025 से लंबित: अभ्यर्थी वर्ष 2025 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले ही अपनी ज्वाइनिंग की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
- पुनः परीक्षा का नोटिस: हाल ही में गृह रक्षा वाहिनी के समादेष्टा द्वारा 13 मार्च को फिर से शारीरिक दक्षता परीक्षा लेने की घोषणा की गई, जिसका अभ्यर्थी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब वे एक बार सफल हो चुके हैं, तो दोबारा परीक्षा क्यों?
होली के त्योहार के बीच अनशन
जहाँ पूरा प्रदेश होली की तैयारियों में जुटा है, वहीं ये अभ्यर्थी अपनी वर्दी के सपने को लेकर समाहरणालय के बाहर डटे हुए थे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी ज्वाइनिंग के लिए मंत्रियों, विधायकों और केंद्रीय मंत्रियों तक गुहार लगाई, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। तीन दिनों से जारी आमरण अनशन के बावजूद प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी उनसे वार्ता करने नहीं पहुंचा, जिससे असंतोष और बढ़ गया।
राजनीतिक समर्थन और तनाव
इस आंदोलन को मटिहानी विधायक बोगो सिंह और सांसद पप्पू यादव जैसे बड़े नेताओं का भी समर्थन प्राप्त था। प्रशासन की इस ‘दमनात्मक’ कार्रवाई की अब चौतरफा आलोचना हो रही है। हर्ल गेट के पास अभ्यर्थियों को बस से उतारे जाने के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए महिला और पुरुष पुलिस बल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि 13 मार्च को होने वाली पुनः परीक्षा की घोषणा के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं किया जा रहा था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी कामकाज में बाधा को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था। फिलहाल हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।



Post Comment