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होली की रौनक पर भारी ‘नेपाल चुनाव’: सीमा सील होने से अररिया के बाजारों में पसरा सन्नाटा

अररिया (जोगबनी)। रंगों का त्योहार होली खुशियों और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है, लेकिन इस बार बिहार के सीमावर्ती जिले अररिया के जोगबनी इलाके में होली का उत्साह कुछ फीका नजर आ रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित इस महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र में इस साल सन्नाटा पसरा है। इसका मुख्य कारण पड़ोसी देश नेपाल में 5 मार्च 2026 को होने वाले चुनाव हैं, जिसके मद्देनजर सुरक्षा कारणों से अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील करने का निर्णय लिया गया है।

2 मार्च से सीमा सील, व्यापार पर संकट

​प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, नेपाल में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए 2 मार्च की रात से सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। यह पाबंदी 5 मार्च की रात तक प्रभावी रहेगी, जबकि आवागमन 6 मार्च से सामान्य हो पाएगा।

​विडंबना यह है कि इस साल होली का मुख्य उत्सव 3 और 4 मार्च को मनाया जाना है। ऐसे में सीमा सील होने के कारण न तो नेपाल के खरीदार भारतीय बाजारों में आ पा रहे हैं और न ही त्योहार के लिए होने वाला पारंपरिक सीमा पार आवागमन संभव हो पा रहा है।

रोटी-बेटी का रिश्ता और बाजार की खामोशी

​जोगबनी और विराटनगर (नेपाल) के बीच केवल व्यापारिक संबंध ही नहीं, बल्कि ‘रोटी-बेटी’ का गहरा सामाजिक रिश्ता भी है। हर साल होली के अवसर पर नेपाल से बड़ी संख्या में लोग जोगबनी बाजार पहुंचते हैं। यहाँ से अबीर-गुलाल, रंग, पिचकारी, बच्चों के मुखौटे, कपड़े और किराना सामान की भारी खरीदारी होती है।

​स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि होली के सीजन में होने वाली कमाई से उनके पूरे साल का बजट चलता है। सीमा बंद होने से फुटकर विक्रेताओं, मिठाई की दुकानों और कपड़ों के व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका है। बाजारों में जो चहल-पहल फरवरी के आखिरी सप्ताह में दिखनी चाहिए थी, वह इस बार गायब है।

व्यापारियों और आम जनता की चिंता

​सीमावर्ती इलाकों के छोटे दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने होली को देखते हुए बड़ी मात्रा में स्टॉक मंगाया था। रंग-बिरंगी टोपियां, पिचकारियां और त्योहार से जुड़ी अन्य सामग्रियां अब दुकानों में धरी की धरी रह गई हैं। नेपाल के नागरिकों के न आने से बिक्री में 60 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।

​वहीं, दूसरी ओर आम जनता भी परेशान है। कई परिवारों के रिश्तेदार सीमा के उस पार रहते हैं, जो हर साल होली पर एक-दूसरे से मिलने आते थे। सीमा सील होने के कारण इस बार रिश्तों की यह मिठास भी कम होती दिख रही है।

सुरक्षा के मद्देनजर अनिवार्य कदम

​जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मतदान से 72 घंटे पहले सीमा सील करना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। एसएसबी (SSB) और स्थानीय पुलिस सीमा पर कड़ी निगरानी रख रही है ताकि किसी भी तरह की अवांछनीय गतिविधि को रोका जा सके।

​अब देखना यह होगा कि 6 मार्च को सीमा खुलने के बाद क्या बाजारों में फिर से वही रौनक लौट पाएगी, या फिर इस बार की होली सीमावर्ती व्यापारियों के लिए केवल घाटे का सौदा बनकर रह जाएगी।

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