विकसित भारत 2047: किरेन रिजिजू ने बताया क्यों जरूरी है सभी 6 अल्पसंख्यक समुदायों का साथ
बिहार (राजगीर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को सिद्ध करने के लिए केंद्र सरकार ने अब जमीनी स्तर पर रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बिहार के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शहर राजगीर में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया।
बुधवार को इस शिविर का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि भारत तभी विकसित राष्ट्र बन सकता है जब देश का हर नागरिक और हर समुदाय विकास की इस दौड़ में कंधे से कंधा मिलाकर चले।
सभी समुदायों की समान भागीदारी पर जोर
नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में रिजिजू ने कहा कि “2047 तक विकसित भारत का सपना केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय लक्ष्य है। इसे साकार करने के लिए देश के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों— मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी— की सक्रिय और समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय इन सभी समुदायों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आबादी के लिहाज से मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा है, लेकिन मंत्रालय का ध्यान सभी छह समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
फाइलों के बोझ से मुक्त होगा क्रियान्वयन
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी योजनाएं शानदार होने के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई के जाल में फंसकर रह जाती हैं। रिजिजू ने इस समस्या पर प्रहार करते हुए कहा कि चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य ‘रेड टेपिज्म’ (लालफीताशाही) को खत्म करना है।
- बेहतर तालमेल: केंद्र और राज्य के अधिकारी आमने-सामने बैठकर चर्चा करेंगे ताकि फाइलों का मूवमेंट तेज हो।
- अनुभवों का साझाकरण: हर राज्य की अपनी चुनौतियां और सफल मॉडल होते हैं। इस शिविर में राज्यों के अधिकारी अपने नए विचार साझा करेंगे।
- टीम वर्क: रिजिजू के अनुसार, केंद्र और राज्य अलग-अलग इकाइयां नहीं, बल्कि एक ‘टीम इंडिया’ के रूप में काम कर रहे हैं।
राजगीर: ज्ञान और सकारात्मकता की भूमि
केंद्रीय मंत्री, जो स्वयं बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, ने राजगीर की धरती को नमन करते हुए कहा कि यह स्थान उनके लिए एक तीर्थ स्थल के समान है। उन्होंने कहा, “राजगीर अध्यात्म और ज्ञान का केंद्र रहा है। यहाँ की सकारात्मक ऊर्जा से हमें योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने की प्रेरणा मिलती है।”
भविष्य की रणनीति और समीक्षा
इस दो दिवसीय शिविर के दौरान मंत्रालय की पुरानी योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। यह देखा जाएगा कि योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँच रहा है या नहीं। साथ ही, भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए नई योजनाओं और संशोधनों पर भी मंथन किया जाएगा।
निष्कर्ष
केंद्रीय मंत्री का यह दौरा और राजगीर में इस तरह के उच्च स्तरीय शिविर का आयोजन यह संकेत देता है कि सरकार अल्पसंख्यकों को केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘विकास के भागीदार’ के रूप में देख रही है। शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार के माध्यम से इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना ही इस चिंतन शिविर का असली लक्ष्य है।



Post Comment