NEET छात्रा मर्डर केस: रिपेयरिंग शॉप नहीं, पान की दुकान से मिला मोबाइल; भाई के दावों ने CBI को भी चौंकाया:-
जहानाबाद/पटना: बिहार के बहुचर्चित नीट (NEET) छात्रा संदिग्ध मौत मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथ एक ऐसी जानकारी लगी है, जिसने जांच की दिशा ही बदल दी है। जिस मोबाइल को सबूत के तौर पर सबसे अहम माना जा रहा है, वह किसी मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर से नहीं, बल्कि एक पान की दुकान से बरामद हुआ है। इस घटनाक्रम ने मृतका के परिजनों के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBI के तेवर और मोबाइल का रहस्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की टीम जब जहानाबाद पहुंची, तो सबसे पहले मृतका की मां और भाई के मोबाइल फोन की मांग की गई। परिजनों ने बताया कि फोन टूट गए हैं और उन्हें ठीक कराने के लिए ‘रिपेयरिंग शॉप’ पर दिया गया है। पहले दिन की लंबी पूछताछ के बाद सीबीआई ने मोबाइल पटना मुख्यालय भेजने का निर्देश दिया था।
सोमवार को जब सीबीआई ने फोन कर मोबाइल मांगा, तो भाई ने टीम को ही पहचानने से इनकार कर दिया और पटना आने में असमर्थता जताई। इसके बाद सीबीआई ने कड़ा रुख अपनाया और टीम सीधे जहानाबाद स्थित उनके घर धमक पड़ी।
रिपेयरिंग शॉप के नाम पर बरगलाने की कोशिश
घर पहुँचने पर भी मृतका के भाई ने वही कहानी दोहराई कि मोबाइल मकदुमपुर में बनने के लिए दिया गया है। इस बार सीबीआई की टीम ने उसे अपनी गाड़ी में बिठाया और सीधे उस दुकान पर ले जाने को कहा। रास्ते भर भाई जांच टीम को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन अंततः उसे एक जगह गाड़ी रुकवानी पड़ी।
हैरानी की बात यह थी कि जहां गाड़ी रुकी, वहां मोबाइल की कोई दुकान नहीं थी। भाई एक पान की दुकान पर गया और वहां से मोबाइल लाकर सीबीआई को सौंप दिया।
पान की दुकान पर मोबाइल: साजिश या इत्तेफाक?
सीबीआई ने जब पान दुकानदार से पूछताछ की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दुकानदार ने बताया:
”आपके (CBI) आने के कुछ ही देर पहले एक लड़का मोबाइल दे गया था। उसने कहा था कि जल्दी से जाकर यह मोबाइल संबंधित दुकान पर दे देना।”
यहाँ जांच एजेंसी के सामने दो बड़े सवाल खड़े हो गए हैं:
- जब मृतका का भाई सीबीआई की हिरासत/गाड़ी में था, तो मोबाइल पान की दुकान तक पहुँचाने का संदेश किसने और कैसे भेजा?
- आखिर मोबाइल को रिपेयरिंग शॉप के बजाय पान की दुकान पर क्यों छिपाया गया था?
तीन घंटे की क्रॉस-पूछताछ और साक्ष्यों की तलाश
मोबाइल बरामद करने के बाद सीबीआई टीम भाई को वापस गांव लेकर गई। वहां घर के सभी सदस्यों को अलग-अलग और फिर आमने-सामने बिठाकर करीब तीन घंटे तक क्रॉस-पूछताछ की गई। हालांकि, परिजनों ने मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और कहा कि वही पुराने सवाल दोहराए जा रहे हैं।
CBI की नजर डिजिटल साक्ष्यों पर
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई अब उस मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा, कॉल लॉग्स और व्हाट्सएप चैट को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। मोबाइल का इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मिलना यह संकेत देता है कि शायद कुछ ऐसा है जिसे छिपाने की कोशिश की जा रही है। बिहार पुलिस जो काम हफ्तों में नहीं कर पाई, सीबीआई ने तकनीकी और जमीनी जांच के जरिए उसे कुछ ही दिनों में निष्कर्ष की ओर मोड़ दिया है।



Post Comment