बिहार विधानसभा: “मनरेगा का 60% पैसा चढ़ावा में जाता है”, राजद विधायक के आरोप पर स्पीकर ने यूं की बोलती बंद
पटना: बिहार विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों काफी गरमाया हुआ है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक गौतम कृष्ण ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। पहली बार विधायक बने गौतम कृष्ण, जो पूर्व में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) रह चुके हैं, ने सीधे तौर पर ग्रामीण विकास विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया।
“60 फीसदी पैसा चढ़ावा की भेंट”
कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गौतम कृष्ण ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सरकारी तंत्र के भीतर भ्रष्टाचार जड़ें जमा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा (MGNREGA) जैसी योजनाओं का लगभग 60 प्रतिशत पैसा भ्रष्टाचार और ‘चढ़ावे’ की भेंट चढ़ जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कागजों पर तो घर बन रहे हैं, लेकिन अगर कोसी क्षेत्र के जमीनी हालात देखे जाएं, तो गरीबों के पास आज भी पक्के मकान नहीं हैं।
गौतम कृष्ण ने व्यक्तिगत पीड़ा साझा करते हुए कहा, “मैं 14 महीने तक BDO रहा। मुझे एक ईमानदार अधिकारी होने के नाते दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया गया। मैंने अपने इस्तीफे में उन तमाम कारणों का जिक्र किया था कि कैसे मुझे तंग किया गया।” उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि विभाग आंख पर पट्टी बांधकर काम कर रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष का हस्तक्षेप और तीखा जवाब
विधायक के इन आरोपों पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने राजद विधायक को टोकते हुए कहा कि वह जिस भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं, वह अब पुरानी बात हो चुकी है। स्पीकर ने कहा, “अब मनरेगा का वह दौर खत्म हो गया। अब सब कुछ पारदर्शी है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर लगाम कसी गई है। अब सारा पैसा DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे गरीबों के बैंक खातों में जाता है, बिचौलियों की जगह अब खत्म हो चुकी है।”
राजू तिवारी और विजय खेमका का पलटवार
विपक्ष के इस हमले में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी भी कूद पड़े। उन्होंने तंज कसते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस पुराने बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘दिल्ली से 100 रुपये चलते हैं तो गरीब तक 15 पैसे पहुंचते हैं’। तिवारी ने कहा कि विधायक जिस लूट की बात कर रहे हैं, वह ‘जंगलराज’ के दौर की विशेषता थी, वर्तमान सुशासन की नहीं।
वहीं, भाजपा विधायक विजय खेमका ने गौतम कृष्ण को याद दिलाया कि वे एनडीए सरकार के शासनकाल में ही बीडीओ बने थे। उन्होंने कहा कि आज बिहार विकास की राह पर है, लेकिन विपक्ष को सिर्फ नकारात्मकता ही नजर आती है। खेमका ने चारा घोटाले और जंगलराज के इतिहास का जिक्र करते हुए राजद पर निशाना साधा।
निष्कर्ष
सदन में हुई इस बहस ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में ‘भ्रष्टाचार बनाम सुशासन’ की बहस को जिंदा कर दिया है। जहां विपक्ष जमीन पर लूट का दावा कर रहा है, वहीं सरकार तकनीक और डीबीटी का हवाला देकर पारदर्शिता का दावा कर रही है।



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