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विधानसभा में चिराग की पार्टी के विधायकों का हंगामा, RJD से माफी मांगने को कहा

बिहार की राजनीति में उस समय जोरदार हलचल मच गई जब विधानसभा सत्र के दौरान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायकों ने सदन में तीखा हंगामा किया। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल के कुछ सदस्यों द्वारा उनकी पार्टी और नेतृत्व को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जिसे वे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सदन की कार्यवाही बाधित
जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, LJP (रामविलास) के विधायक अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। उन्होंने RJD नेताओं से तत्काल माफी मांगने की मांग रखी। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी करनी पड़ी।
चिराग पासवान के नेतृत्व का हवाला
पार्टी विधायकों ने कहा कि उनके नेता चिराग पासवान के खिलाफ की गई टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत अपमान है बल्कि उनके समर्थकों का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि जब तक RJD की ओर से औपचारिक माफी नहीं दी जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।
आरोप और प्रत्यारोप का दौर
विवाद उस समय और बढ़ गया जब RJD विधायकों ने भी पलटवार करते हुए कहा कि उनकी बातों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उन्होंने हंगामे को “राजनीतिक नौटंकी” बताया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के अन्य सदस्य भी बहस में शामिल हो गए, जिससे माहौल और गरमा गया।
अध्यक्ष की अपील
स्थिति बिगड़ती देख विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और सभी दलों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन जनहित के मुद्दों पर चर्चा का मंच है, इसलिए अनावश्यक हंगामा लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को आपसी संवाद से समाधान निकालने की सलाह दी।
सरकार की प्रतिक्रिया
सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि विपक्ष को सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सदस्य ने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है तो नियमों के तहत जांच कर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन हंगामा समाधान नहीं है।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले चुनावों से पहले बढ़ती सियासी तल्खी का संकेत है। चिराग पासवान की पार्टी लगातार अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है, वहीं RJD भी विपक्ष की मुख्य भूमिका में आक्रामक रणनीति अपनाए हुए है।
आगे क्या?
फिलहाल सदन में शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। यदि माफी या स्पष्टीकरण आता है तो विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा आने वाले सत्रों में भी हंगामे की आशंका बनी रहेगी।
निष्कर्ष:
बिहार विधानसभा में हुआ यह हंगामा राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के रुख पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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