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खगड़िया: GNM ट्रेनिंग सेंटर में छात्राओं से अवैध वसूली का खेल, आरोपी ट्यूटर ने नोटिस का नहीं दिया जवाब; जांच कमेटी गठित।

​भूमिका
​बिहार के खगड़िया जिले से स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। सदर अस्पताल परिसर में स्थित जीएनएम (GNM) ट्रेनिंग सेंटर में छात्राओं से कथित तौर पर अवैध वसूली की जा रही थी। इस मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर नर्सिंग ट्यूटर सरफिना कुमारी का नाम सामने आया है। प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए ट्यूटर के खिलाफ जांच तेज कर दी है। विभाग की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब न देना अब ट्यूटर के लिए भारी पड़ता दिख रहा है।
​क्या है पूरा विवाद?
​जीएनएम स्कूल की छात्राओं ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि नर्सिंग ट्यूटर सरफिना कुमारी प्रशिक्षण (Training) और अन्य आधिकारिक कार्यों के नाम पर उनसे जबरन पैसों की मांग करती हैं। छात्राओं का कहना है कि पैसे न देने पर उन्हें प्रताड़ित करने या प्रशिक्षण में बाधा डालने की धमकी दी जाती थी।
​जब यह मामला सिविल सर्जन के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए 9 मई 2026 को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया। ट्यूटर को 24 घंटे के भीतर सभी आरोपों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण देने को कहा गया था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला।
​प्रशासन की सख्ती: 4 सदस्यीय जांच समिति गठित
​निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने को सिविल सर्जन डॉ. रमेन्द्र कुमार ने अनुशासनहीनता माना है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है।
​जांच टीम में ये अधिकारी हैं शामिल:
​डॉ. विजय कुमार: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी
​डॉ. सुशांत सौरव: प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, खगड़िया
​डॉ. शशिवाला सिंह: चिकित्सा पदाधिकारी, सदर अस्पताल
​रंजीत कुमार: जिला लेखा प्रबंधक (DAM)
​यह समिति छात्राओं द्वारा दिए गए आवेदन, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की बारीकी से जांच करेगी। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
​छात्राओं के भविष्य पर संकट
​ट्रेनिंग सेंटर में इस तरह की अवैध वसूली से छात्राओं का भविष्य और उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कई छात्राओं ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो यह वसूली लंबे समय तक जारी रहती। जांच टीम अब यह भी पता लगाएगी कि क्या इस खेल में ट्यूटर के साथ अन्य लोग भी शामिल थे।
​पहले भी रही हैं शिकायतें
​सदर अस्पताल खगड़िया अक्सर चर्चाओं में रहता है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, संस्थान के भीतर प्रशासनिक पकड़ ढीली होने के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार होती हैं। सिविल सर्जन डॉ. रमेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित ट्यूटर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई जा सकती है।
​निष्कर्ष
​स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से अन्य भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें एक सप्ताह बाद आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या छात्राओं को न्याय मिलेगा और क्या ट्रेनिंग सेंटर में व्याप्त इस भ्रष्टाचार का अंत होगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।

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