गोपालगंज: खाकी हुई शर्मसार! JDU विधायक का बॉडीगार्ड और SP सेल का सिपाही 300 लीटर शराब के साथ गिरफ्तार, लग्जरी कार से कर रहे थे तस्करी।
भूमिका
बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वही अब इस कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला गोपालगंज जिले से सामने आया है, जहाँ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को ही 300 लीटर से अधिक विदेशी शराब के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में से एक सत्तारूढ़ JDU विधायक का अंगरक्षक है और दूसरा पुलिस अधीक्षक (SP) की टेक्निकल सेल का सिपाही है। इस खुलासे के बाद पूरे बिहार पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
वाहन जांच के दौरान खुली पोल
मिली जानकारी के अनुसार, गोपालपुर थाना पुलिस इलाके में नियमित वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान उत्तर प्रदेश की ओर से आ रही एक संदिग्ध सफेद रंग की ब्रेजा कार को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस को देखकर कार सवारों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस बल ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया। जब कार की तलाशी ली गई, तो पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। कार के भीतर भारी मात्रा में विदेशी शराब की बोतलें छिपाई गई थीं।
हाई-प्रोफाइल निकले आरोपी: विधायक और एसपी से कनेक्शन
शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की, लेकिन कड़ाई से हुई जांच में उनकी पहचान उजागर होते ही पुलिस महकमे के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अमित कुमार: यह आरोपी बैकुंठपुर से जेडीयू विधायक मंजीत सिंह का अंगरक्षक (Bodyguard) निकला। पता चला कि वह रात में अपनी ड्यूटी छोड़कर निजी कार से शराब की खेप लाने यूपी गया था।
राहुल कुमार: दूसरा आरोपी गोपालगंज एसपी की टेक्निकल सेल में तैनात सिपाही है।
दोनों पुलिस की वर्दी का रौब दिखाकर बॉर्डर पार करने की फिराक में थे, लेकिन अपनी ही विभाग की मुस्तैदी का शिकार हो गए।
विधायक मंजीत सिंह की सफाई
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। जेडीयू विधायक मंजीत सिंह ने इस मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि सिपाही अमित कुमार की गतिविधियां पिछले कुछ दिनों से संदिग्ध लग रही थीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चार दिन पहले ही लिखित रूप में उसे हटाने की सिफारिश की थी। विधायक ने कहा कि अपराधी का कोई दल या विभाग नहीं होता, कानून को अपना काम करना चाहिए।
गोपालगंज में पहले भी दागदार हुई है खाकी
यह पहली बार नहीं है जब गोपालगंज पुलिस के दामन पर शराब के दाग लगे हों।
इससे पहले कुचायकोट के तत्कालीन थानाध्यक्ष रितेश कुमार सिंह को शराब मामले में संलिप्तता के कारण बर्खास्त किया जा चुका है।
जिले के कई अन्य पुलिसकर्मी भी पूर्व में शराब माफियाओं से सांठगांठ के आरोप में सलाखों के पीछे जा चुके हैं।
कठोर कार्रवाई की तैयारी: सदर एसडीपीओ का बयान
सदर एसडीपीओ प्रांजल ने बताया कि दोनों सिपाहियों के पास से कुल 300 लीटर से अधिक विदेशी शराब बरामद की गई है। उनके खिलाफ शराबबंदी कानून के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच चलाकर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
निष्कर्ष
शराबबंदी वाले बिहार में रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो कानून पर सवाल उठना लाजमी है। यह घटना दर्शाती है कि शराब माफियाओं के नेटवर्क ने पुलिस तंत्र के भीतर तक अपनी पैठ बना ली है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन “काली भेड़ों” को बाहर निकालने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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