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Bihar: दिवाली की रात भाई-भाभी व भतीजी की हत्या करने वाले को मिली फांसी की सजा, पहले से उम्रकैद काट रहा आरोपी

Bihar: बेगूसराय में वर्ष 2019 की दिवाली की रात हुए तिहरे हत्याकांड में अदालत ने मुख्य आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। जमीन विवाद और गवाही को लेकर हुए इस जघन्य अपराध में आरोपी पहले से ही एक अन्य हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

Man sentenced to death for killing brother sister-in-law and niece on Diwali night in begusarai Bihar

सांकेतिक तस्वीर – फोटो : अमर उजालाविज्ञापन

विस्तार

बिहार के बेगूसराय में वर्ष 2019 की दिवाली की रात हुए सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी विकास कुमार उर्फ विकास सिंह को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला सिंघौल थाना क्षेत्र के मचहा गांव का है, जहां दिवाली की रात एक ही परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाई गई फांसी की सजा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बेउर जेल में बंद दोषी को मृत्युदंड का आदेश सुनाया। बताया जा रहा है कि बेगूसराय के न्यायिक इतिहास में पहली बार किसी दोषी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फांसी की सजा सुनाई गई है।
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जमीन विवाद से जुड़ा था मामला
मिली जानकारी के अनुसार, पूरा विवाद चार बीघा जमीन को लेकर शुरू हुआ था। वर्ष 2012 में आरोपी विकास सिंह ने अपने चाचा अरुण सिंह की हत्या की थी, जिसके लिए उसे पहले ही आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। वर्ष 2017 में अपनी चाची मुन्नी देवी की हत्या का मामला भी न्यायालय में लंबित है। बताया जाता है कि इन दोनों मामलों में मृतक कुणाल सिंह प्रमुख गवाह थे। आरोप है कि विकास सिंह अपने भाई कुणाल सिंह पर गवाही नहीं देने का दबाव बना रहा था। इनकार करने पर उसने वर्ष 2019 में अपने साथियों के साथ मिलकर तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था।
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दिवाली की रात हुआ था तिहरा हत्याकांड
27 अक्टूबर 2019 की रात करीब 10 बजे आरोपी ने अपने भाई कुणाल सिंह, भाभी कंचन देवी और 17 वर्षीय भतीजी सोनम कुमारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद घर से निकलते समय उसका सामना भतीजे शिवम कुमार से हुआ। आरोप है कि उसने शिवम के सीने पर पिस्तौल सटाकर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन संयोगवश गोली नहीं चली और उसकी जान बच गई। शिवम जब घर के अंदर गया तो उसने अपने माता-पिता और बहन को खून से लथपथ पाया।  

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गवाहों के अधार पर कोर्ट ने सुनाई सजा
इस चर्चित मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी राम प्रकाश यादव ने प्रभावी पैरवी की। अदालत में बाबू साहब सिंह, विजय सिंह, डॉ. संजय कुमार, सत्यम कुमार, प्रत्यक्षदर्शी शिवम कुमार तथा अनुसंधानकर्ता मनीष कुमार सिंह समेत कई महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही हुई। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। विज्ञापन

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