बिहार: सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला, संस्थानों से हटा ‘संजय गांधी’ का नाम; जानें अब क्या होगी नई पहचान
बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘नाम बदलने’ के फैसले ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। भाजपा के नेतृत्व वाली सम्राट चौधरी सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे और कांग्रेस नेता संजय गांधी के नाम पर चल रहे तीन प्रमुख संस्थानों का नाम बदल दिया है। मुख्यमंत्री बनने के महज 15 दिनों के भीतर सम्राट चौधरी के इस फैसले की चर्चा अब पूरे देश में हो रही है।
1. किन संस्थानों के नाम बदले गए?
राज्य कैबिनेट ने कुल 63 प्रस्तावों पर मुहर लगाई, जिनमें से सबसे चर्चित निर्णय संजय गांधी के नाम को हटाने का रहा। जिन संस्थानों के नाम बदले गए हैं, वे इस प्रकार हैं:
| पुराना नाम | नया नाम |
|---|---|
| संजय गांधी जैविक उद्यान | पटना जू (Patna Zoo) |
| संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन समिति | पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी |
| संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी | बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी |
मंत्रिमंडल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन संस्थानों के नाम में बदलाव को स्वीकृति दे दी है।
2. पटना जू: 1973 में पड़ा था संजय गांधी का नाम
पटना का चिड़ियाघर बिहार के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। इसकी कहानी 1969 में शुरू हुई थी जब तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की 34 एकड़ जमीन दान में दी थी।
- कांग्रेस का दौर: 1973 में जब यह उद्यान पूरी तरह स्थापित हुआ, तब बिहार में कांग्रेस की सरकार थी। इसी कारण इसका नाम तत्कालीन युवा नेता संजय गांधी के नाम पर रखा गया था।
- वर्तमान स्थिति: आज यह जू 150 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है और यहाँ 70 प्रजातियों के 800 से अधिक जानवर रहते हैं। सरकार का तर्क है कि चूंकि आम बोलचाल में लोग इसे ‘पटना जू’ ही कहते हैं, इसलिए कागजों पर भी अब यही नाम रहेगा।
3. डेयरी इंस्टीट्यूट का भी बदला स्वरूप
पटना में स्थित संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना 1980 में हुई थी। यह संस्थान बिहार पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता है और डेयरी इंजीनियरिंग व प्रोसेसिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करता है।
- नया नाम: अब इसे बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी के नाम से जाना जाएगा। सरकार के इस फैसले को कांग्रेस की विरासत को कम करने और क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है।
4. विपक्ष का हमला: तेजस्वी यादव ने घेरा
सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में केवल तीन लोग अपनी मनमानी चला रहे हैं। उन्होंने इसे एक ‘निरर्थक सरकार’ बताते हुए कहा कि जनता को अब इस सरकार से कोई उम्मीद नहीं है।
5. सम्राट चौधरी का भाजपाई एजेंडा?
सम्राट चौधरी बिहार के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो शुद्ध रूप से भाजपा पृष्ठभूमि से आते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाम बदलने का यह फैसला भाजपा के उस बड़े एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों से गांधी-नेहरू परिवार के नाम हटाकर उन्हें स्थानीय या ऐतिहासिक नामों से बदला जा रहा है।
निष्कर्ष
बिहार में संस्थानों के नाम बदलने की यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश भी है। जहां सत्ता पक्ष इसे ‘जनभावना और सरलीकरण’ का नाम दे रहा है, वहीं विपक्ष इसे ‘बदले की राजनीति’ करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार विधानसभा में भी गरमाने की पूरी संभावना है।



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