बिहार फ्लोर टेस्ट: क्या फिर ‘खेला’ होगा? महागठबंधन के 4 विधायकों पर टिकी निगाहें, समझिए विधानसभा का पूरा गणित
पटना: बिहार की सियासत में ‘विश्वास’ की जंग अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज विधानसभा में बहुमत प्रस्ताव पेश करने जा रहे हैं। फ्लोर टेस्ट की इस घड़ी में सबकी नजरें महागठबंधन के उन विधायकों पर टिकी हैं, जिन्होंने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी का साथ छोड़ दिया था।
राज्यसभा चुनाव में गायब रहे थे ये 4 चेहरे
नवंबर 2025 के चुनाव परिणामों के बाद महागठबंधन के पास केवल 35 विधायक बचे थे। लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान वोटिंग के वक्त इनमें से 4 विधायक रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे:
- मनोज बिश्वास (कांग्रेस, फारबिसगंज): वोटिंग के दिन इनका फोन स्विच ऑफ रहा।
- सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा (कांग्रेस, वाल्मीकिनगर): होटल में विधायकों की बैठक से नदारद रहे।
- मनोहर प्रसाद सिंह (कांग्रेस, मनिहारी): संपर्क से बाहर रहने वाले तीसरे विधायक।
- फैसल रहमान (RJD, ढाका): राजद के इकलौते गायब विधायक, जिन्होंने बाद में माँ की बीमारी का हवाला दिया।
इन विधायकों की अनुपस्थिति के कारण राजद के इकलौते राज्यसभा उम्मीदवार को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
व्हिप जारी न करना: मजबूरी या रणनीति?
दिलचस्प बात यह है कि फ्लोर टेस्ट से पहले राजद और कांग्रेस ने अपने विधायकों के लिए व्हिप (Whip) जारी नहीं किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष को और भी विधायकों के टूटने का डर है। यदि व्हिप जारी किया जाता और विधायक उसका उल्लंघन करते, तो पार्टी को उन पर कार्रवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष को लिखना पड़ता, जिससे संख्या बल और कम हो जाता।
हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप और 15 करोड़ की चर्चा
राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस-वोटिंग के बाद तेजस्वी यादव ने एनडीए पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ का गंभीर आरोप लगाया था। चर्चा यहाँ तक रही कि गायब हुए विधायकों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया। एनडीए लगातार दावा कर रहा है कि महागठबंधन के कई और विधायक उनके संपर्क में हैं और फ्लोर टेस्ट के दौरान वे सदन में एनडीए के पाले में बैठे नजर आ सकते हैं।
विधानसभा चुनाव 2025 के बाद का समीकरण
2025 के चुनाव नतीजों ने बिहार के सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल दिया था। एनडीए ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि महागठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया:
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 25 सीटें
- कांग्रेस: 06 सीटें
- वाम दल (Left): 03 सीटें
- IIP: 01 सीट
निष्कर्ष
आज का फ्लोर टेस्ट केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्षी एकता की परीक्षा भी है। यदि महागठबंधन अपने बचे हुए 35 विधायकों को भी एकजुट नहीं रख पाता, तो आने वाले समय में तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले इस गठबंधन के लिए राजनीतिक भविष्य काफी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। क्या ये विधायक सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे या एक बार फिर ‘लापता’ होकर नया राजनीतिक भूचाल लाएंगे, यह कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगा।



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