दरभंगा संस्कृत विवि में भारी बवाल: राज्यपाल के आने से पहले आत्मदाह का प्रयास, 178 करोड़ के आवंटन के बाद भी वेतन-पेंशन को तरस रहे कर्मचारी
राजनगरी में प्रशासनिक भूचाल: आत्मदाह की कोशिश से सहमा परिसर
दरभंगा। बिहार के एकमात्र कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का धैर्य जवाब दे गया। बुधवार को बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन के आगमन से ठीक एक दिन पहले विश्वविद्यालय परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब एक आक्रोशित पेंशनधारी ने खुद पर केरोसिन छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया, जिसे मौके पर मौजूद लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए विफल कर दिया।
178 करोड़ के आवंटन के बावजूद भुगतान नहीं: विधायक का आरोप
प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बेनीपुर से जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी और पूर्व विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। विधायक विनय कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा:
”राज्य सरकार ने वेतन और पेंशन के लिए 178 करोड़ रुपये का आवंटन पहले ही कर दिया है, लेकिन विवि प्रशासन जानबूझकर भुगतान रोककर बैठा है। यह शायद देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जहाँ 20 महीनों से शिक्षकों को वेतन नहीं मिला और छात्रों को अंकपत्र (Marksheet) तक नसीब नहीं हो रहा।”
कुलपति पर भ्रष्टाचार और जातिवाद के गंभीर आरोप
हंगामे के बीच सीनेट की बैठक में शामिल होने पहुंचे सदस्यों को भी मुख्य द्वार पर रोक दिया गया। इस दौरान कुलपति लक्ष्मी निवास पांडेय और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई। प्रदर्शनकारियों और सीनेट सदस्यों ने कुलपति पर भ्रष्टाचार, जातिवाद और प्रशासनिक अक्षमता के गंभीर आरोप लगाए। बढ़ते तनाव को देखते हुए सिण्डिकेट और सीनेट की महत्वपूर्ण बैठकों को फिलहाल टाल दिया गया है।
राज्यपाल के दौरे पर संकट के बादल?
बुधवार को राज्यपाल का दौरा प्रस्तावित है, लेकिन विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वेतन और पेंशन का भुगतान शुरू नहीं होता, वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
प्रमुख बिंदु: क्यों सुलग रहा है विश्वविद्यालय?
- बकाया भुगतान: यूजीसी (UGC) से नियुक्त शिक्षकों को पिछले 20 महीनों से वेतन नहीं मिला है।
- पेंशनधारकों की पीड़ा: सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने हक के पैसे के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
- छात्रों की समस्या: परीक्षा परिणाम आने के बावजूद अंकपत्र (Mark sheet) वितरण में देरी।
- प्रशासनिक गतिरोध: सरकार से फंड मिलने के बावजूद आंतरिक विवादों के कारण भुगतान लटका होना।



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