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नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की मुलाकात: बिहार की नई सरकार के बीच ‘तालमेल’ की नई तस्वीर

पटना। बिहार की राजनीति में शनिवार को एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार अचानक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने उनके आवास 5, देशरत्न मार्ग पहुंचे। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी भी मौजूद रहे। राज्य में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद यह पहला मौका है जब नीतीश कुमार खुद चलकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों से मिलने पहुंचे हैं।

मुलाकात की गर्मजोशी और ‘कंधे पर हाथ’ का संदेश

​मुलाकात के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे बिहार एनडीए के भीतर मजबूत होते रिश्तों की गवाही दे रही हैं। नीतीश कुमार काफी प्रसन्न नजर आए और उन्होंने एक बार फिर सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर अपना स्नेह और आशीर्वाद दिया। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूरी विनम्रता के साथ हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया।

​नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को बधाई देते हुए कहा, “अच्छे से काम करते रहिए आपलोग।” लगभग 15 मिनट चली इस औपचारिक मुलाकात में राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, प्रशासनिक कामकाज और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होने की खबरें हैं।

शराबबंदी पर सम्राट के फैसले ने जीता नीतीश का दिल

​जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात की एक बड़ी वजह शराबबंदी कानून पर सम्राट चौधरी का हालिया स्टैंड है। नई सरकार बनने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार शराबबंदी कानून की समीक्षा कर सकती है या इसे खत्म कर सकती है। एनडीए के ही कई विधायक इसके पक्ष में बयान दे रहे थे।

​हालांकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि बिहार में शराबबंदी कानून न केवल जारी रहेगा, बल्कि इसे और भी सख्ती से लागू किया जाएगा। सम्राट चौधरी का यह फैसला सीधे तौर पर नीतीश कुमार के विजन का समर्थन है, जिससे नीतीश कुमार काफी गदगद बताए जा रहे हैं।

विपक्ष का भी मिला साथ

​हैरानी की बात यह है कि सम्राट चौधरी के इस फैसले का स्वागत केवल जदयू ने ही नहीं, बल्कि मुख्य विपक्षी दल राजद (RJD) ने भी किया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने सम्राट चौधरी की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के संकल्पों को आगे बढ़ाकर अपनी प्रशासनिक परिपक्वता का परिचय दिया है।

सियासी मायने: समीकरणों का संतुलन

​बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की यह सक्रियता दर्शाती है कि भले ही वह अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं हैं, लेकिन सरकार की नीतियों और एनडीए के भीतर उनकी भूमिका अभी भी केंद्रीय है। सम्राट चौधरी के साथ उनकी यह केमिस्ट्री विपक्ष को भी एक कड़ा संदेश दे रही है कि एनडीए गठबंधन पूरी तरह से एकजुट है।

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