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नितिन नवीन का इस्तीफा: पिता की विरासत से राज्यसभा तक का सफर, भावुक पोस्ट में कही ये बड़ी बातें

बिहार की राजनीति में बड़े बदलावों के बीच बांकीपुर से 5 बार के विधायक और भाजपा नेता नितिन नवीन ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सोमवार को उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया। इस ऐतिहासिक मोड़ पर नितिन नवीन अपने पिता और मार्गदर्शक स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा को याद कर भावुक हो गए।

​उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पिता की तस्वीर साझा करते हुए एक बेहद भावुक संदेश लिखा, जिसमें उन्होंने अपने 20 साल के राजनीतिक सफर का निचोड़ प्रस्तुत किया।

​1. पिता के निधन के बाद शुरू हुआ था सफर

​नितिन नवीन ने अपनी पोस्ट में याद दिलाया कि उनका राजनीतिक जीवन एक कठिन समय में शुरू हुआ था। उन्होंने लिखा:

​”जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया। 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार निर्वाचित हुआ। पिछले 20 वर्षों में मैंने पिताजी द्वारा बनाए गए इस क्षेत्र को एक परिवार की तरह सींचने और संवारने का प्रयास किया है।”

​2. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पीएम मोदी का जताया आभार

​नितिन नवीन ने अपने कार्यकाल के दौरान मिले अवसरों के लिए नेतृत्व का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में उन्हें बिहार सरकार में मंत्री के रूप में कार्य करने और महत्वपूर्ण नीतियों को लागू करने का मौका मिला। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार व्यक्त किया कि उन्हें जनता की सेवा के लिए बड़ी भूमिकाएं दी गईं।

​3. “विधायक पद छोड़ रहा हूँ, साथ नहीं”

​बांकीपुर की जनता और अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि भले ही वह आज विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं, लेकिन उनका रिश्ता अटूट रहेगा।

  • नया संकल्प: उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो नई जिम्मेदारी (राज्यसभा) दी है, उसके माध्यम से भी वह बिहार और अपने क्षेत्र के विकास के लिए संकल्पित रहेंगे।
  • जनता का स्नेह: नितिन नवीन ने बांकीपुर की जनता को ‘देवतुल्य’ बताते हुए कहा कि उनके स्नेह और मार्गदर्शन ने ही उन्हें आज इस मुकाम तक पहुँचाया है।

​4. 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य

​नितिन नवीन ने अपने संदेश का समापन भविष्य के विजन के साथ किया। उन्होंने कहा कि वह पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत और विकसित बिहार 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

​निष्कर्ष

​नितिन नवीन का इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि बांकीपुर में एक युग का अंत और राष्ट्रीय राजनीति में एक नई शुरुआत है। अपनी जड़ों और पिता की विरासत को याद करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे बिहार की आवाज को अब दिल्ली के उच्च सदन (राज्यसभा) में और मजबूती से उठाएंगे।

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