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बिहार: हड़ताल पर अड़े राजस्व अधिकारियों को डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की कड़ी चेतावनी, 25 मार्च तक काम पर लौटने का अल्टीमेटम

पटना। बिहार में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर गए राजस्व अधिकारियों और एनडीए (NDA) सरकार के बीच तकरार बढ़ गई है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताली अधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि अधिकारी 25 मार्च 2026 की शाम 5 बजे तक काम पर वापस नहीं लौटते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​सामूहिक अवकाश को बताया ‘अवैध’

​डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने राजस्व सेवा के अधिकारियों द्वारा 9 मार्च 2026 से लिए गए सामूहिक अवकाश को पूरी तरह नियमों के विरुद्ध और अवैध करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का आचरण न केवल प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि इससे आम जनता के महत्वपूर्ण कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। सिन्हा ने दो टूक शब्दों में कहा कि नीतीश सरकार जनहित के मुद्दों और प्रशासनिक व्यवस्था के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।

​क्यों नाराज है सरकार?

​सरकार की नाराजगी का एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगामी कार्यक्रम हैं। विजय सिन्हा ने बताया कि वर्तमान में मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ और ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होने वाले हैं। ऐसे समय में राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इन कार्यक्रमों के दौरान ड्यूटी से गायब रहना ‘गंभीर लापरवाही’ की श्रेणी में आता है, जिसे सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।

​अल्टीमेटम: “काम पर लौटें वरना होगी जेल और वेतन कटौती”

​उपमुख्यमंत्री ने सभी संबंधित पदाधिकारियों के लिए एक समयसीमा (Deadline) निर्धारित की है:

  1. डेडलाइन: 25 मार्च 2026, शाम 5:00 बजे तक।
  2. कार्रवाई: यदि इस समय तक अधिकारी योगदान नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ ‘सेवा टूट’ (Break in Service), वेतन कटौती और अन्य कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
  3. राहत का रास्ता: उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिकारी निर्धारित समय के भीतर काम पर वापस आ जाएंगे, उनके अवकाश की अवधि के समायोजन पर नियमों के तहत सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

​जनता की परेशानी पर जताई चिंता

​विजय सिन्हा ने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद का रास्ता हमेशा खुला रहता है, लेकिन जनता को बंधक बनाकर अपनी मांगें मनवाना उचित नहीं है। जाति प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज और जमीन से जुड़े अन्य जरूरी कामों के लिए लोग कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे तुरंत अपने दायित्वों का निर्वहन शुरू करें ताकि आम नागरिकों को और असुविधा न हो।

​बिहार सरकार का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह राज्य में भूमि सुधार और सुशासन के एजेंडे को लेकर किसी भी दबाव में आने को तैयार नहीं है। अब देखना यह होगा कि सरकार के इस अल्टीमेटम के बाद राजस्व अधिकारी अपनी हड़ताल खत्म करते हैं या टकराव की स्थिति और गहरी होती है।

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