मोकामा के ‘छोटे सरकार’ का भव्य स्वागत: 100 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे अनंत सिंह, चुनावी उत्तराधिकारी का किया ऐलान
पटना/मोकामा। बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह जेल से रिहा होने के बाद अपने गृह क्षेत्र मोकामा पहुंचे। साढ़े चार महीने बाद जनता के बीच लौटे अनंत सिंह का स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था। पटना से मोकामा तक के रास्ते में समर्थकों ने पलक-पांवड़े बिछा दिए। 100 से अधिक लग्जरी गाड़ियों के काफिले और गगनभेदी नारों के बीच अनंत सिंह ने साफ कर दिया कि मोकामा की सियासत में उनका दबदबा आज भी कायम है।
100 गाड़ियों का काफिला और ‘शेर-ए-बिहार’ के नारे
मंगलवार सुबह करीब नौ बजे अनंत सिंह पटना स्थित अपने आवास से मोकामा के लिए रवाना हुए। उनके काफिले में 100 से ज्यादा गाड़ियां शामिल थीं। जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ा, समर्थकों की संख्या बढ़ती गई। अथमलगोला, सबनीमा और बाढ़ के एसबीआर चौराहे पर हजारों की भीड़ उनके इंतजार में खड़ी थी। समर्थकों ने उन्हें ‘शेर-ए-बिहार’ की उपाधि दी और जमकर आतिशबाजी की। अनंत सिंह ने हाथ हिलाकर सबका अभिवादन स्वीकार किया और लोगों का आभार व्यक्त किया।
”अब बेटा लड़ेगा चुनाव” – राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत
पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने संकेत दिया कि वे खुद अब चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे। उन्होंने कहा, “मैं अब चुनाव नहीं लड़ूंगा। मेरा बेटा अब क्षेत्र में घूमेगा, लोगों की मदद करेगा और जनता चाहेगी तो वही चुनाव लड़ेगा।” इस बयान के बाद मोकामा की राजनीति में उत्तराधिकार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। माना जा रहा है कि अनंत सिंह अब किंगमेकर की भूमिका में रहकर अपने बेटे को राजनीति की कमान सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।
कुलदेवी का आशीर्वाद और मंदिर निर्माण का वादा
काफिला सबसे पहले अनंत सिंह के पैतृक गांव नदावां पहुंचा। वहां उन्होंने अपनी कुलदेवी के मंदिर में मत्था टेका और पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर के पुजारी ने उनसे गांव में एक भव्य शिव मंदिर बनवाने का आग्रह किया। इस पर अनंत सिंह ने तुरंत सहमति देते हुए कहा, “सबकुछ भगवान का ही दिया हुआ है, मंदिर एकदम बनाया जाएगा।” भक्ति और शक्ति के इस मेल ने स्थानीय ग्रामीणों के बीच उनके प्रति उत्साह को और बढ़ा दिया।
जनसमस्याओं का मौके पर समाधान
नदावां और बाढ़ के भ्रमण के दौरान अनंत सिंह केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने रास्ते में रुक-रुक कर लोगों की समस्याएं सुनीं। कई मामलों का उन्होंने मौके पर ही फोन के जरिए या अधिकारियों से बात कर समाधान निकाला। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि वे जेल में रहें या बाहर, मोकामा की जनता के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं।
बड़हिया में माता का दर्शन
नदावां में पूजा के बाद अनंत सिंह का काफिला प्रसिद्ध बड़हिया मां जगदम्बा मंदिर के लिए रवाना हुआ। बेऊर जेल से बाहर आने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम था, जिसे आगामी चुनावों से पहले एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। भले ही उन्होंने खुद चुनाव न लड़ने की बात कही हो, लेकिन 100 गाड़ियों का यह काफिला विरोधियों के लिए एक कड़ा संदेश है।



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