बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मियों के लिए नई ‘सोशल मीडिया नियमावली’ लागू, अब रील्स और ट्रोलिंग पर गिरेगी गाज
पटना, बिहार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुशासन को लेकर अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। सरकार ने ‘बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976’ में बड़ा संशोधन करते हुए नई ‘बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026’ को मंजूरी दे दी है।
राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होते ही यह नियम पूरे राज्य में प्रभावी हो गए हैं। अब सरकारी कर्मचारियों के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल पहले जैसा नहीं रहेगा।
सोशल मीडिया प्रोफाइल और DP पर पाबंदी
नई नियमावली के अनुसार, कोई भी सरकारी सेवक अपने सोशल मीडिया अकाउंट (DP या प्रोफाइल फोटो) पर:
- किसी राजनीतिक दल का चिन्ह नहीं लगा सकेगा।
- किसी संगठनात्मक संकेत या विरोध के प्रतीक का उपयोग नहीं कर पाएगा।
- राजनीतिक विचारधारा या चुनाव से जुड़े प्रचार-प्रसार से पूरी तरह दूर रहना होगा।
रील्स बनाने और लाइव प्रसारण पर रोक
अक्सर देखा जाता है कि कर्मचारी दफ्तरों के अंदर वीडियो या रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं। नए नियमों ने इस पर पूर्ण विराम लगा दिया है:
- कार्यस्थल (Office) से जुड़े वीडियो, रील्स या लाइव प्रसारण करना वर्जित होगा।
- किसी शिकायतकर्ता के साथ बातचीत का ऑडियो या वीडियो सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
- सरकारी ई-मेल या मोबाइल नंबर का उपयोग निजी सोशल मीडिया अकाउंट के लिए नहीं किया जा सकेगा।
सरकार की आलोचना पड़ेगी भारी
गजट नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी कर्मचारी, चाहे वह अपने असली नाम से हो या छद्म (Fake) नाम से, सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, योजनाओं या न्यायालय के फैसलों की आलोचना नहीं कर सकेगा। साथ ही, किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या मीडिया संस्थान के पक्ष या विपक्ष में राय व्यक्त करना भी ‘आचार संहिता’ का उल्लंघन माना जाएगा।
बुलिंग और ट्रोलिंग पर विभागीय कार्रवाई
सरकार ने डिजिटल अनुशासन पर जोर देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर किसी को ट्रोल करना या बुलिंग (Bullying) करना अब दंडनीय होगा। कर्मचारियों को हर हाल में शालीन भाषा का प्रयोग करना होगा। भड़काऊ, अश्लील या ऐसी कोई भी सामग्री पोस्ट करना जिससे सरकार की छवि धूमिल हो, सीधे तौर पर सेवा से बर्खास्तगी या गंभीर दंड का कारण बन सकता है।
नियमावली के मुख्य बिंदु (एक नजर में):
| नियम | क्या करें / क्या न करें |
|---|---|
| सोशल मीडिया अकाउंट | बिना अनुमति के सरकारी कार्यों के लिए उपयोग प्रतिबंधित। |
| कंटेंट | अश्लील, भड़काऊ या सरकार विरोधी पोस्ट पर पूर्ण रोक। |
| गोपनीयता | संवेदनशील जानकारी या आधिकारिक फाइलों की फोटो शेयर करना मना है। |
| प्रोफाइल फोटो | राजनीतिक या संगठनात्मक लोगो लगाना वर्जित। |
| कार्यस्थल | ऑफिस के अंदर वीडियो या रील्स बनाना प्रतिबंधित। |
निष्कर्ष
बिहार सरकार का यह कदम सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और अनुशासन लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया के इस दौर में इन नियमों का पालन जमीनी स्तर पर कितनी कड़ाई से होता है। कर्मचारियों को अब अपनी ‘डिजिटल लाइफ’ और ‘प्रोफेशनल लाइफ’ के बीच एक बहुत ही बारीक रेखा खींचनी होगी।



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