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बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर: ‘अब युवाओं के बाद मुख्यमंत्री का भी पलायन’, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर प्रशांत किशोर का तीखा हमला

बिहार की राजनीति इन दिनों बड़े बदलावों और तीखी बयानबाजी के केंद्र में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर करारा हमला बोला है। सासाराम में मीडिया से मुखातिब होते हुए पीके ने बिहार की वर्तमान स्थिति की तुलना ‘पलायन’ से की, लेकिन इस बार उनके निशाने पर सिर्फ आम जनता नहीं, बल्कि खुद मुख्यमंत्री थे।

“युवाओं के बाद अब मुख्यमंत्री का पलायन”

प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार की त्रासदी यह थी कि यहाँ से वर्षों से युवाओं का पलायन हो रहा था। रोजगार की तलाश में यहाँ के बच्चे दर-दर भटक रहे थे, लेकिन अब बिहार में एक नया दौर शुरू हुआ है—अब यहाँ के मुख्यमंत्री भी पलायन कर रहे हैं। पीके ने कहा कि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला यह साबित करता है कि वे अब बिहार की चुनौतियों का सामना करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले एक साल से कह रहे थे कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति अब मुख्यमंत्री जैसे भारी-भरकम पद की जिम्मेदारी संभालने लायक नहीं रह गई है, और आज उनकी यह बात सच साबित हो रही है।

पलायन और मौतों पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने डेटा का हवाला देते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल नवंबर के बाद से अब तक बिहार के 50 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों की अन्य राज्यों में संदिग्ध परिस्थितियों में या हादसों में मौत हो चुकी है। पीके ने जनता को आगाह करते हुए कहा कि जब तक लोग जाति, धर्म और थोड़े से पैसों के लालच में वोट देते रहेंगे, तब तक बिहार की यह तस्वीर नहीं बदलेगी। उन्होंने अपनी हार पर आत्ममंथन करते हुए स्वीकार किया कि शायद उन्होंने “ईमानदारी और बच्चों के भविष्य” के नाम पर वोट मांगकर गलती की, क्योंकि जनता को अभी भी पारंपरिक चुनावी प्रलोभन ही समझ आते हैं।

परिवारवाद और निशांत कुमार पर कटाक्ष

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की सुगबुगाहट पर भी प्रशांत किशोर ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को राजनीति में आने का हक है, इसलिए निशांत का स्वागत है। लेकिन इसी बहाने उन्होंने ‘परिवारवाद’ पर बड़ा हमला बोला। पीके ने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि बिहार के बड़े नेताओं ने अपने बच्चों के लिए तो ‘राज सिंहासन’ सुरक्षित कर लिया है, लेकिन बिहार की जनता आज भी अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करने के बजाय उन्हीं नेताओं के पीछे भाग रही है।

जन सुराज की नई रणनीति

प्रशांत किशोर ने हार से हताश होने के बजाय संगठन को और मजबूत करने का एलान किया। उन्होंने घोषणा की कि अगले छह महीनों के भीतर ‘जन सुराज’ एक नए कलेवर में सामने आएगा। इसके लिए संगठन का पुनर्गठन किया जा रहा है और वे खुद प्रत्येक जिले में तीन दिनों का प्रवास करेंगे। उनका लक्ष्य कार्यकर्ताओं के सुझावों के आधार पर एक ऐसी व्यवस्था खड़ी करना है जो बिहार में असल ‘व्यवस्था परिवर्तन’ ला सके।

​निष्कर्ष के तौर पर, प्रशांत किशोर का यह हमला स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीतिक जमीन पर जन सुराज और सत्ता पक्ष के बीच संघर्ष और तेज होने वाला है।

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