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​Israel-Iran War: बिहार के बाजारों पर पड़ा युद्ध का साया, ईरानी खजूर और पिस्ता गायब; रमजान से पहले बढ़ी टेंशन

मुजफ्फरपुर। सात समंदर पार खाड़ी देशों में छिड़ी जंग की तपिश अब बिहार के स्थानीय बाजारों तक पहुँच गई है। इस्राइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने बिहार के व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के प्रमुख बाजारों से ईरानी खजूर और पिस्ता लगभग गायब हो चुके हैं, जिससे आने वाले त्योहारों के सीजन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

बाजार से गायब हुई ‘ईरानी मिठास’

​मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध कंपनी बाग रोड स्थित थोक और खुदरा बाजारों में पिछले करीब एक सप्ताह से ईरान से आने वाली वस्तुओं की आपूर्ति ठप है। दुकानदार बताते हैं कि खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर ब्रेक लग गया है। अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और स्वाद के लिए मशहूर ईरानी खजूर, जो रमजान के पाक महीने में इफ्तार की सबसे प्रमुख सामग्री होती है, अब दुकानों के रैक से नदारद है।

बढ़ती कीमतें और ग्राहकों की बेरुखी

​सप्लाई चेन टूटने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। जो खजूर बाजार में स्टॉक के रूप में उपलब्ध है, उसकी कीमतों में भारी उछाल आया है।

  • दुकानदारों का दर्द: व्यापारियों का कहना है कि पहले जो ग्राहक किलो के भाव में खजूर ले जाते थे, अब वे सिर्फ 250 ग्राम या आधा किलो ही खरीद रहे हैं।
  • मायूसी: दुकानदार मोहम्मद शाहिद हुसैन और अन्य व्यापारियों ने बताया कि माल नहीं आने से बिक्री 50% तक गिर गई है। अगर यही स्थिति रही, तो ईद तक ईरानी मेवे पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।

रमजान और त्योहारों पर संकट

​मार्च के इस महीने में रमजान का समय नजदीक है, ऐसे में ईरानी खजूर की भारी मांग रहती है। मध्य पूर्व के देशों से आने वाले खजूर न केवल मीठे होते हैं, बल्कि इनमें पोषक तत्व भी अधिक होते हैं। युद्ध के कारण पिस्ता की आपूर्ति भी बाधित हुई है, जिससे मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ने की आशंका है।

महंगाई की मार से ग्राहक परेशान

​बाजार में खरीदारी करने आए ग्राहकों का कहना है कि खजूर की कीमत अब आम आदमी के बजट से बाहर होती जा रही है। युद्ध की वजह से न केवल विदेशी माल महंगा हुआ है, बल्कि बाजार में एक अनिश्चितता का माहौल बन गया है। लोगों को डर है कि अगर जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए, तो ड्राई फ्रूट्स के दाम आसमान छूने लगेंगे।

व्यापारियों की उम्मीदें

​मुजफ्फरपुर के कंपनी बाग रोड बाजार के दुकानदारों को अब बस एक ही उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के जरिए जल्द ही तनाव कम हो। व्यापारियों का कहना है कि अगर आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

निष्कर्ष:

यह घटना दर्शाती है कि वैश्विक राजनीति और युद्ध किस प्रकार एक छोटे शहर के आम आदमी की थाली और एक छोटे व्यापारी के गल्ले को प्रभावित करते हैं। बिहार के बाजारों में पसरी यह मायूसी तब तक दूर नहीं होगी, जब तक खाड़ी में शांति बहाल नहीं होती।

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