बिहार विधानसभा: हाईटेंशन तारों के मुद्दे पर अपनों के बीच ही घिरी नीतीश सरकार, सदन में भारी हंगामा:-
पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को बिजली विभाग के एक पुराने और संवेदनशील मुद्दे पर सदन की कार्यवाही काफी गरमा गई। राज्य के विभिन्न जिलों में रिहायशी इलाकों और घरों के ठीक ऊपर से गुजरने वाले 11,000 वोल्ट के हाईटेंशन तारों को लेकर सत्ता पक्ष (BJP) और विपक्ष (RJD) के विधायक एक सुर में नजर आए। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के तीखे तेवरों ने नीतीश सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया।
विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने ऊर्जा विभाग का ध्यानाकर्षण किया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि बिहार में सैकड़ों ऐसे घर हैं, जिनकी छतों से महज चार-पांच फीट की ऊंचाई पर मौत का जाल (हाईटेंशन तार) बिछा हुआ है।
सिंह ने सवाल उठाया, “अगर 11,000 वोल्टेज का तार किसी के बेडरूम या छत के ठीक ऊपर से गुजर रहा हो, तो वहां रहने वाले परिवार की मानसिक स्थिति क्या होगी? क्या सरकार उन गरीब लोगों के घरों से तार हटाने पर विचार कर रही है जो सुपरविजन की भारी-भरकम राशि नहीं दे सकते? कई जगहों पर तो मकान बनने के बाद विभाग ने जबरन तार खींच दिए हैं।”
ऊर्जा मंत्री के जवाब पर बिफरे विधायक
इस मामले पर ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि आमतौर पर बिजली के तार पहले खींचे जाते हैं और मकानों का निर्माण बाद में किया जाता है। मंत्री के इस तर्क पर सदन में मौजूद विधायक भड़क गए। जब राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बीच में टोकने की कोशिश की, तो मंत्री विजेंद्र यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा, “ऐसा लगता है जैसे मैं विधायक ही नहीं हूं। अगर विधायक जी को लगता है कि मकान बनने के बाद तार खींचे गए हैं, तो वे लिखित में दें, मैं जांच कराऊंगा।”
इस बयान के बाद सदन में गहमागहमी बढ़ गई। भाजपा विधायक शालिनी मिश्रा और मुरारी मोहन झा ने भी इस मुद्दे को “जान-माल का गंभीर खतरा” बताया। विधायकों का आरोप था कि अधिकारी बार-बार शिकायत के बावजूद संवेदनहीन बने रहते हैं।
पक्ष-विपक्ष का दिखा दुर्लभ मेल
हैरानी की बात यह रही कि इस मुद्दे पर राजद (RJD) विधायक रणविजय साहू ने भी भाजपा विधायक का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र के महादलित टोलों में भी यही स्थिति है, जहां लोग हर पल मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। सदन में मौजूद लगभग सभी विधायकों ने एक साथ खड़े होकर इस समस्या को पूरे राज्य की समस्या बताया और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश
सदन में बढ़ते हंगामे और विधायकों के सामूहिक आक्रोश को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सरकार को निर्देश दिया कि सभी सदस्यों के सुझावों और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस मामले की गंभीरता से समीक्षा की जाए और प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए।



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