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​बिहार न्यूज़: स्कूल के दूषित पानी ने बढ़ाई चिंता, एक साथ बीमार हुए एक दर्जन छात्र

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। चनपटिया प्रखंड स्थित भैंसही रिफ्यूजी प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार को स्कूल के चापाकल का पानी पीने से हड़कंप मच गया। विद्यालय के करीब 12 बच्चों ने जैसे ही चापाकल का पानी पीया, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। बच्चों को गंभीर रूप से उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत होने के बाद आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कैसे हुई घटना?

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को स्कूल खुलने के कुछ देर बाद ही सामान्य दिनों की तरह बच्चों ने प्यास लगने पर परिसर में लगे चापाकल का पानी पीया। सबसे पहले चार-पांच बच्चों ने पानी पीया, जिन्हें कुछ ही मिनटों में घबराहट और पेट में मरोड़ महसूस होने लगी। जब तक शिक्षक कुछ समझ पाते, तब तक कुछ और बच्चों ने भी वही पानी पी लिया। देखते ही देखते पिंकी कुमारी, हिमांशु, प्रिंस, अरुण, शिवानी, बिट्टू, साजन, सिमरन, भोला, विशाल, कृष्णा और विकास कुमार सहित 12 बच्चों की हालत बिगड़ गई।

स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल

बच्चों की बिगड़ती स्थिति को देख विद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका माला कुमारी ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी। बच्चों को पहले भैंसही के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एंबुलेंस से बेतिया के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH) रेफर कर दिया गया।

प्रशासनिक सतर्कता और जांच के आदेश

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक अभिषेक रंजन सक्रिय हुए। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और GMCH प्रशासन से फोन पर बात कर बच्चों के लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि फिलहाल बच्चों की स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चापाकल के पानी का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के सटीक कारण का पता चल सकेगा।

अभिभावकों में भारी आक्रोश और डर

इस घटना के बाद बच्चों के माता-पिता और स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। परिजनों का कहना है कि स्कूल में पीने के पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रधानाध्यापिका के अनुसार, बच्चे रोजाना इसी चापाकल का पानी पीते थे, लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ, यह जांच का विषय है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले के सभी सरकारी स्कूलों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

​यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट का इंतजार है ताकि यह साफ हो सके कि पानी में कोई जहरीला पदार्थ था या यह किसी संक्रमण का नतीजा है।

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