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शहादत को सलाम: झारखंड में नक्सल मुठभेड़ के दौरान बेगूसराय का लाल मुरारी कुमार शहीद, गांव में उमड़ा जनसैलाब

बेगूसराय: देश की सेवा और नक्सलवाद के खात्मे के संकल्प के साथ मैदान में डटे बिहार के लाल मुरारी कुमार ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। झारखंड के गुमला और पश्चिमी सिंहभूम के जंगलों में चल रहे एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान (Anti-Naxal Operation) के दौरान आईआरबी (IRB) के जवान मुरारी कुमार शहीद हो गए। शनिवार देर रात जैसे ही उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर पहुंचा, पूरे इलाके में ‘शहीद मुरारी अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से आसमान गूंज उठा।

सारंडा के जंगलों में हुई थी भीषण मुठभेड़

​बताया जा रहा है कि झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ एक व्यापक संयुक्त अभियान चलाया जा रहा था। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार नक्सलवाद के सफाए के लिए चलाए जा रहे इस मिशन में करीब 4,000 जवान तैनात थे। शनिवार सुबह सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच आमने-सामने की मुठभेड़ हुई। इस गोलीबारी में तीन से चार जवानों को गोलियां लगीं, जिनमें मुरारी कुमार भी शामिल थे। घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली।

22 साल की उम्र में दिया सर्वोच्च बलिदान

​शहीद मुरारी कुमार बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत श्रीपुर पंचायत के उप मुखिया प्रदुमन चौधरी उर्फ ‘बरे लाल’ के छोटे पुत्र थे। मात्र 22 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद होने वाले मुरारी की खबर सुनते ही उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मुरारी के भाई सत्यम चंद्र ने बताया कि पिछले तीन दिनों से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था, और फिर अचानक विभाग से उनकी तबीयत खराब होने और बाद में शहादत की सूचना मिली।

रात 2 बजे अंतिम दर्शन को उमड़े हजारों लोग

​शहीद का पार्थिव शरीर शनिवार देर रात सेना के विशेष वाहन से बेगूसराय लाया गया। सीवरी पुल के पास पहले से ही सैकड़ों युवा तिरंगा लेकर शहीद के इंतजार में खड़े थे। रात के दो बजे जब तिरंगे में लिपटा वीर सपूत अपने गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी। बाइक जुलूस और नारों के बीच पार्थिव शरीर को उनके पैतृक घर ले जाया गया, जहाँ सुबह से ही अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी है।

नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

​सुरक्षा बलों का कहना है कि मुरारी कुमार जैसे वीर जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ घेराबंदी अभी भी जारी है। बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों के सफाए के लिए सुरक्षा बल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुरारी की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार के युवा देश की अखंडता के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से कभी पीछे नहीं हटते।

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