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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर बिहार: 10 से 28 फरवरी तक चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन एमडीए अभियान

पटना, बिहार:
फाइलेरिया जैसी गंभीर और लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने एक व्यापक जनस्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की है। राज्य में 10 फरवरी से 28 फरवरी तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान चलाया जाएगा। इस बार अभियान को और अधिक प्रभावी और ऐतिहासिक बनाने के लिए इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जोड़ने की भी तैयारी की गई है।
क्या है फाइलेरिया (हाथीपांव) रोग?
फाइलेरिया एक परजीवी जनित बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है। यह शरीर के लसीका तंत्र (Lymphatic System) को प्रभावित करती है, जिससे हाथ-पैर या जननांगों में असामान्य सूजन हो जाती है। गंभीर स्थिति में यह आजीवन विकलांगता का कारण बन सकती है।
एमडीए अभियान क्या है?
मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाती हैं, ताकि:
संक्रमण की श्रृंखला टूटे
मच्छरों के माध्यम से फैलाव रुके
भविष्य में नए मरीज न बनें
इस दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, आशा व आंगनबाड़ी सेविकाएं लोगों को दवा खिलाने का काम करेंगी।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि अभियान अवधि में अधिकतम लोगों को एक साथ फाइलेरिया रोधी दवा खिलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया जाए। इसके लिए:
बड़े पैमाने पर माइक्रो-प्लानिंग
जिलावार लक्ष्य निर्धारण
स्कूलों, पंचायतों व शहरी वार्डों की भागीदारी
रियल-टाइम मॉनिटरिंग
की व्यवस्था की गई है।
किन लोगों को दी जाएगी दवा?
अभियान के तहत अधिकांश आबादी को दवा दी जाएगी, लेकिन कुछ श्रेणियां इससे बाहर रहेंगी:
दवा नहीं दी जाएगी:
2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को
गर्भवती महिलाओं को
गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को
बाकी सभी पात्र लोगों को स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में दवा खानी होगी।
सरकार की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है:
दवा खाने से न डरें
यह पूरी तरह सुरक्षित है
खाली पेट न खाएं
स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही दवा लें
अभियान की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर मानी जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
बिहार फाइलेरिया प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है
लाखों लोग जोखिम क्षेत्र में रहते हैं
समय पर दवा से रोग पूरी तरह रोका जा सकता है
विकलांगता व सामाजिक-आर्थिक बोझ कम होगा
जागरूकता पर विशेष जोर
अभियान के दौरान:
माइकिंग
पोस्टर-बैनर
स्कूल जागरूकता कार्यक्रम
ग्राम सभाएं
आयोजित कर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
निष्कर्ष
फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बिहार का यह कदम न केवल जनस्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के माध्यम से राज्य को वैश्विक पहचान दिलाने का भी प्रयास है। यदि हर नागरिक दवा खाकर सहयोग करे, तो फाइलेरिया मुक्त बिहार का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सकता है।

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